Silent Noise
Tuesday, December 20, 2011
खावाहिशों का काफ़िला भी अजीब है..
गुज़रता वहीँ से है जहाँ रास्ते नहीं होते!!
Thursday, December 8, 2011
बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यों नहीं जाता,
जो बीत गया है वो गुज़र क्यों नहीं जाता,
वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में,
जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नहीं जाता,
सब कुछ तो है क्या ढूंढ़ती रहती हैं निगाहें,
क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यों नहीं जाता,
मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा,
जाते हैं जिधर सब मैं उधर क्यों नहीं जाता,
वो नाम जो बरसों से समाया है ज़ेहन में,
वो खवाब अगर है तो बिखर क्यों नहीं जाता!!
Tuesday, December 6, 2011
ये नहीं के मेरा.. दौर गुज़र गया,
बस ये है के एक नए दौर से रहा हूँ गुज़र!!
तुमको दे दी है इशारों में इजाज़त मैंने,
मांगने से ना मिलूँ तो चुरा लो मुझको
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