Wednesday, May 14, 2014

तन्हाई तू भी बोल कभी

दिल के सन्नाटे खोल कभी,
तन्हाई तू भी बोल कभी...
परछाईयाँ चुनता रहता है
क्यों रिश्ते बुनता रहता है
इन वादों के पीछे कोई नहीं
क्यों वादे सुनता रहता है.

दिल के सन्नाटे खोल कभी,
तन्हाई तू भी बोल कभी...
बुझ जायेगी सारी आवाज़ें
यादें- यादें रह जायेगी
तस्वीरें बचेगी आँखों में
और बातें सब कह जायेगी.
दिल के सन्नाटे खोल कभी,
तन्हाई तू भी बोल कभी.........

~ GULZAR

 

Thursday, May 8, 2014

निंदिया कैसे समाये

दो नैनो में आँसू भरे हैं, निंदिया कैसे समाये
डूबी डूबी आखों में, सपनों के साये
रातभर अपने हैं, दिन में पराये
कैसे नैनों में निंदिया समाये
झूठे तेरे वादों पे बरस बिताये
जिंदगी तो काटी, ये रात कट जाये
कैसे नैनों में निंदिया समाये
दो नैनो में आँसू भरे हैं, निंदिया कैसे समाये.......


~Gulzar

Monday, May 5, 2014



फिर किसी शाख ने फेंकी छाँव
फिर किसी शाख ने हाथ हिलाया
फिर किसी मोड़ से उलझे पाँव
फिर किसी राह ने पास बुलाया
लब पे आता नही था नाम उनका
आज आया तो बार बार आया
बेवजह बेक़रार रहते थे
बेवजह आज फिर क़रार आया
हम तो भूले हुये थे दिल को मगर
दिल ने क्यों आज हमको याद किया
क्यों कुरेद़ा पुराना ज़ख़्म उसने
क्यों किसी भूले ग़म को याद किया.....


~Gulzar