Tuesday, January 28, 2014

मस्जिद तो हुई हासिल हमको, खाली ईमान गंवा बैठे ।
मंदिर को बचाया लढ-भीडकर, खाली भगवान गंवा बैठे ।

धरती को हमने नाप लिया, हम चांद सितारों तक पहुंचे ।
कुल कायनात को जीत लिया, खाली इन्सान गंवा बैठे ।

मजहब के ठेकेदारोंने आज फिर हमे युं भडकाया ।
के काजी और पंडित जिन्दा थे, हम अपनी जान गंवा बैठे ।

सरहद जब जब भी बंटती है, दोनो नुकसान उठाते है ।
हम पाकिस्तान गंवा बैठे, वो हिन्दुस्तान गंवा बैठे |