दिल के सन्नाटे खोल कभी, तन्हाई तू भी बोल कभी...
परछाईयाँ चुनता रहता है क्यों रिश्ते बुनता रहता है इन वादों के पीछे कोई नहीं क्यों वादे सुनता रहता है.
दिल के सन्नाटे खोल कभी, तन्हाई तू भी बोल कभी...
बुझ जायेगी सारी आवाज़ें यादें- यादें रह जायेगी तस्वीरें बचेगी आँखों में और बातें सब कह जायेगी.
दिल के सन्नाटे खोल कभी, तन्हाई तू भी बोल कभी.........
दो नैनो में आँसू भरे हैं, निंदिया कैसे समाये
डूबी डूबी आखों में, सपनों के साये रातभर अपने हैं, दिन में पराये कैसे नैनों में निंदिया समाये
झूठे तेरे वादों पे बरस बिताये जिंदगी तो काटी, ये रात कट जाये कैसे नैनों में निंदिया समाये
दो नैनो में आँसू भरे हैं, निंदिया कैसे समाये.......
~Gulzar
Monday, May 5, 2014
फिर किसी शाख ने फेंकी छाँव फिर किसी शाख ने हाथ हिलाया फिर किसी मोड़ से उलझे पाँव फिर किसी राह ने पास बुलाया
लब पे आता नही था नाम उनका आज आया तो बार बार आया बेवजह बेक़रार रहते थे बेवजह आज फिर क़रार आया
हम तो भूले हुये थे दिल को मगर दिल ने क्यों आज हमको याद किया क्यों कुरेद़ा पुराना ज़ख़्म उसने क्यों किसी भूले ग़म को याद किया.....
~Gulzar
Wednesday, April 16, 2014
Dimaag Pe Zor Daal Ke Ginte Ho Galtiya Meri...
Kabhi Dil Pe Hath Rakh Ke Puchna kasoor KisKa tha..!!
*********
Koi Rishta Jo Na Hota To Wo Khafa Kyun Hota ... Yehi Be-Rukhi Us Ki Mohabbat Ka Pata Deti H ..!!
************
Udasi Shaam Tanhai Kasak Yaadon Ki BeChaini ... Mujhe Sab Sonp Kar Soraj Utarta Jata Hai Pani Me ..!!
******************
Mujh Ko Khud Mein Jaga Nahi Milti ... Tu Hai Maujood Is Qadar Mujh Mein ...!! ***************
Tuesday, January 28, 2014
मस्जिद तो हुई हासिल हमको, खाली ईमान गंवा बैठे । मंदिर को बचाया लढ-भीडकर, खाली भगवान गंवा बैठे ।
धरती को हमने नाप लिया, हम चांद सितारों तक पहुंचे । कुल कायनात को जीत लिया, खाली इन्सान गंवा बैठे ।
मजहब के ठेकेदारोंने आज फिर हमे युं भडकाया । के काजी और पंडित जिन्दा थे, हम अपनी जान गंवा बैठे ।
सरहद जब जब भी बंटती है, दोनो नुकसान उठाते है । हम पाकिस्तान गंवा बैठे, वो हिन्दुस्तान गंवा बैठे |