Silent Noise
Tuesday, October 14, 2014
तेरी
यादें
याद
है
,
सपनो
को
सजना
भूल
गये
,
रोते
है
हम
दिन
रात
मगर
,
अश्को
को
बहाना
भूल
गये
,
ये ना सोचो बदल गया मैं,
बदल गयी मेरी चाहत,
सीने मे है अब भी दर्द,
बस हाल-ए-दिल सुनना भूल गये
इलाही
क्या
मोहब्बत
का
सिला
है
मैं
उसको
वो
किसी
को
सोचता
है
कभी
बसता
था
जो
दिल
में
हमारे
,
परायी
आँख
का
काजल
बना
है
,
कोई
उम्मीद
तुम
उससे
ना
रखना
,
हमें
मालूम
है
वो
बेवफा
है
,
शिकन
लफ़्ज़ों
पे
मेरे
आ
गयी
क्यूँ
,
वो
चुप
रह
के
भी
क्या
क्या
बोलता
है
Monday, October 13, 2014
आ
गयी
याद
शाम
ढलते
ही
बुझ
गया
दिल
चिराग
जलते
ही
खुल
गये
शहर
-
ए
-
गम
के
दरवाज़े
एक
ज़रा
सी
हवा
के
चलते
ही
कौन था तू के फिर ना देखा तुझे
मिट गया ख्वाब आँख मलते ही
तू भी जैसे बदल सा जाता है
अक्स-ए-दीवार के बदलते ही
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