Monday, May 5, 2014



फिर किसी शाख ने फेंकी छाँव
फिर किसी शाख ने हाथ हिलाया
फिर किसी मोड़ से उलझे पाँव
फिर किसी राह ने पास बुलाया
लब पे आता नही था नाम उनका
आज आया तो बार बार आया
बेवजह बेक़रार रहते थे
बेवजह आज फिर क़रार आया
हम तो भूले हुये थे दिल को मगर
दिल ने क्यों आज हमको याद किया
क्यों कुरेद़ा पुराना ज़ख़्म उसने
क्यों किसी भूले ग़म को याद किया.....


~Gulzar

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