फिर किसी शाख ने फेंकी छाँव
फिर किसी शाख ने हाथ हिलाया
फिर किसी मोड़ से उलझे पाँव
फिर किसी राह ने पास बुलाया
लब पे आता नही था नाम उनका
आज आया तो बार बार आया
बेवजह बेक़रार रहते थे
बेवजह आज फिर क़रार आया
हम तो भूले हुये थे दिल को मगर
दिल ने क्यों आज हमको याद किया
क्यों कुरेद़ा पुराना ज़ख़्म उसने
क्यों किसी भूले ग़म को याद किया.....
~Gulzar
आज आया तो बार बार आया
बेवजह बेक़रार रहते थे
बेवजह आज फिर क़रार आया
हम तो भूले हुये थे दिल को मगर
दिल ने क्यों आज हमको याद किया
क्यों कुरेद़ा पुराना ज़ख़्म उसने
क्यों किसी भूले ग़म को याद किया.....
~Gulzar
No comments:
Post a Comment