Friday, November 18, 2011


ये  शीशों  के  सपने ,
ये  धागों  के  रिश्ते ,
किसे  है  खबर  के  कहाँ  टूट  जाएँ ,
मोहब्बत  के  दरिया  में  तिनके  वफ़ा  के ,
किसे  है  खबर  के  कहाँ  डूब  जाएँ ,
अजब  दिल  की  बस्ती ,
अजब  दिल  की  हालत ,
हर एक  मोड़  मोसम  नयी  चाहतों  का ,
लगाये  हैं  हम  ने  भी  सपनों  के  पोधे ,
मगर  क्या  भरोसा  यहाँ  बारिशों  का ?
जिन्हें  दिल  से  सोचा ,
जिन्हें  दिल  से  चाहा ,
किसे  है  खबर  के  कहाँ  रूठ  जाएँ ..?
ये  शीशों  के  सपने ,
ये  धागों  के  रिश्ते!!


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