ये शीशों के सपने ,
ये धागों के रिश्ते ,
किसे है खबर के कहाँ टूट जाएँ ,
मोहब्बत के दरिया में तिनके वफ़ा के ,
किसे है खबर के कहाँ डूब जाएँ ,
अजब दिल की बस्ती ,
अजब दिल की हालत ,
हर एक मोड़ मोसम नयी चाहतों का ,
लगाये हैं हम ने भी सपनों के पोधे ,
मगर क्या भरोसा यहाँ बारिशों का ?
जिन्हें दिल से सोचा ,
जिन्हें दिल से चाहा ,
किसे है खबर के कहाँ रूठ जाएँ ..?
ये शीशों के सपने ,
ये धागों के रिश्ते!!
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