Saturday, November 19, 2011



न करते शोर शराबा तो और क्या करते,
तुम्हारे शहर में कुछ और काम काज भी हो

रहेगी कब तलक वादों में कैद खुशहाली,
हर एक बार ही कल क्यूं?? कभी तो आज भी हो

हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो
अगर न हो कही ऐसा तो एहतजाज भी हो


- निदा फाजली

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