दुआ करो की ये पौधा सदा हरा ही लगे
उदासियों से भी ये चेहरा खिला खिला ही लगे
ये चाँद तारो का नहीं उसी का हिस्सा है
कोई जो दूसरा हो तो दूसरा ही लगे
नहीं है मेरे मुकद्दर में रौशनी न सही
ये खिड़की खोलो सुबह की हवा ही लगे
अजीब शख्स है नाराज़ होके हँसता है
मैं चाहता हूँ खफा वो है तो खफा ही लगे
दुआ करो की ये पौधा सदा हरा ही लगे
~ बशीर बद्र
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